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चतुर बीरबल की कहानी: बादशाह की मूंछ और मिठाई

बादशाह अकबर की मूंछ किसने खींची? जानिए चतुर बीरबल ने इस गुस्ताखी के लिए क्या मजेदार सजा बताई। पढ़िए यह हँसाने वाली हिंदी कहानी। Fun Stories | Moral Stories

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चतुर बीरबल की कहानी: बच्चों, भारत के इतिहास में मुगल बादशाह जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर और उनके नवरत्नों में से सबसे खास, बीरबल (Birbal) - विकिपीडिया के किस्से बहुत मशहूर हैं। बीरबल का असली नाम महेश दास था और वे अपनी हाज़िरजवाबी के लिए जाने जाते थे।

अकबर और बीरबल की नोक-झोंक और बीरबल की बुद्धिमानी की चतुर बीरबल की कहानी (Clever Birbal Story) आज भी बच्चों और बड़ों को लोटपोट कर देती है। आज हम आपको एक ऐसा ही मजेदार किस्सा सुनाने जा रहे हैं, जहाँ बीरबल ने एक असंभव सवाल का ऐसा जवाब दिया कि गुस्से से लाल बादशाह भी हँस पड़े।

दरबार में अजीब सवाल

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एक दिन बादशाह अकबर का दरबार सजा हुआ था। सभी मंत्री, सेनापति और दरबारी अपनी-अपनी जगह बैठे थे। माहौल थोड़ा गंभीर था। अचानक बादशाह अकबर ने अपनी शाही मूंछों पर ताव दिया और एक बहुत ही अजीब सवाल पूछ लिया।

अकबर ने कड़कती आवाज़ में पूछा, "दरबारियों! मुझे एक बात बताओ। अगर कोई व्यक्ति मेरी मूंछ खींचने की जुर्रत करे, तो उसे क्या सजा मिलनी चाहिए?"

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यह सवाल सुनते ही पूरे दरबार में सन्नाटा छा गया। हवा निकल गई सबकी! भला 'जिल्ले-इलाही' (बादशाह) की मूंछ खींचने की हिम्मत कौन कर सकता है? यह तो सीधे मौत को दावत देने जैसा था।

दरबारियों के क्रोधित जवाब

सबसे पहले सेनापति खड़े हुए। वे गुस्से में लाल-पीले हो रहे थे। उन्होंने तलवार पर हाथ रखते हुए कहा, "जहाँपनाह! यह तो घोर अपराध है! अगर कोई ऐसा दुस्साहस करे, तो उसका सिर धड़ से अलग कर देना चाहिए। उसे जीने का कोई हक नहीं है।"

दूसरे मंत्री ने कहा, "नहीं-नहीं सेनापति जी, मौत की सजा तो कम है। उस गुस्ताख को तो कोड़ों से मारना चाहिए या फिर हाथी के पैरों तले कुचलवा देना चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी बादशाह की शान में गुस्ताखी न कर सके।"

एक और दरबारी, जो बादशाह को खुश करने में लगा रहता था, बोला, "हुजूर! उस आदमी को तो काल कोठरी में बंद कर देना चाहिए और उसे भूखा-प्यासा रखना चाहिए।"

सभी दरबारी एक से बढ़कर एक कठोर सजा बता रहे थे। बादशाह अकबर सबकी बातें सुन रहे थे, लेकिन उनके चेहरे पर वो संतुष्टि नहीं थी।

बीरबल की बारी और चौंकाने वाला जवाब

अंत में बादशाह की नज़र बीरबल पर पड़ी। बीरबल चुपचाप मुस्कुरा रहे थे। अकबर ने पूछा, "बीरबल! तुम चुप क्यों हो? तुम्हें क्या लगता है, मेरी मूंछ खींचने वाले को क्या सजा मिलनी चाहिए?"

बीरबल अपनी जगह से उठे और विनम्रता से बोले, "जहाँपनाह! अगर आप मेरी राय मानें, तो जिसने भी आपकी मूंछ खींचने की हिम्मत की है, उसे सजा नहीं..." दरबारियों की सांसें अटक गईं। बीरबल क्या कह रहे हैं?

बीरबल ने अपनी बात पूरी की, "...उसे सजा के बदले ढेर सारी मीठी मिठाइयां (Sweets) खिलानी चाहिए!"

दरबार में हंगामा

बीरबल का जवाब सुनते ही दरबार में खलबली मच गई। सेनापति चिल्लाए, "बीरबल! क्या तुम होश में हो? बादशाह की तौहीन करने वाले को मिठाई? तुम गद्दारी कर रहे हो!" बाकी दरबारी भी बीरबल का मज़ाक उड़ाने लगे। बादशाह अकबर की भौहें तन गईं। उन्होंने गुस्से से पूछा, "बीरबल! यह तुम क्या कह रहे हो? क्या मूंछ खींचना कोई बहादुरी का काम है जो उसे मिठाई खिलाई जाए? अपनी बात का मतलब समझाओ वरना तुम्हें भी सजा मिलेगी।"

बीरबल का मजेदार तर्क

बीरबल ने मुस्कुराते हुए कहा, "शांत हो जाइए महाराज! मैंने जो कहा, सोच-समझकर कहा। इस दुनिया में सिर्फ एक ही ऐसा इंसान है जो भारत के बादशाह की मूंछ खींचने की हिम्मत कर सकता है और वह भी बिना किसी डर के।"

अकबर ने हैरानी से पूछा, "कौन है वह?"

बीरबल ने उत्तर दिया, "वह है - आपका अपना छोटा सा पोता (Grandson)! हुजूर, केवल एक छोटा बच्चा ही अपनी दादा की गोद में खेलते हुए उनकी मूंछ खींच सकता है। और जब वह ऐसा करता है, तो आप उसे सजा नहीं देंगे, बल्कि प्यार से उसे गले लगाएंगे और मिठाई खिलाएंगे।"

हँसी के ठहाके

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बीरबल का जवाब सुनकर बादशाह अकबर सन्न रह गए। उन्हें तुरंत याद आया कि आज सुबह ही जब वे अपने पोते के साथ खेल रहे थे, तो उस नन्हे बच्चे ने उनकी मूंछ पकड़कर खींची थी। यह बात बीरबल ने बिना बताए ही समझ ली थी।

अकबर जोर से ठहाका मारकर हँस पड़े - "वाह बीरबल वाह! तुमने तो हमारे दिल की बात छीन ली। वाकई, आज सुबह हमारे पोते ने ही यह गुस्ताखी की थी।"

बाकी दरबारी, जो बीरबल को फंसाने के चक्कर में थे, अपने-अपने मुंह छिपाने लगे। सेनापति भी शर्मिंदा हो गए कि उन्होंने बच्चे को मारने की बात कह दी थी। अकबर ने अपनी गले से मोतियों की माला उतारकर बीरबल को पहना दी और कहा, "बीरबल, तुम्हारी बुद्धिमानी का कोई जवाब नहीं। तुम सच में नवरत्नों में अनमोल हो।"

बच्चों, अकबर बीरबल की कहानियां (Akbar Birbal Stories in Hindi) हमें सिखाती हैं कि हर समस्या का समाधान गुस्से से नहीं, बल्कि ठंडे दिमाग और समझदारी से करना चाहिए। बीरबल ने अपनी चतुराई से न केवल बादशाह का गुस्सा शांत किया, बल्कि माहौल को खुशनुमा भी बना दिया।

इस कहानी से सीख (Moral of the Story):

  1. बुद्धि का प्रयोग: जल्दबाजी में कोई राय नहीं बनानी चाहिए, पहले बात की गहराई को समझना चाहिए।

  2. हाज़िरजवाबी: सही समय पर सही बात कहना एक बहुत बड़ी कला है।

  3. गुस्सा कम अक्ल: गुस्से में इंसान सही फैसला नहीं ले पाता, जबकि शांत दिमाग हर पहेली सुलझा सकता है। 

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Tags: Akbar Birbal Stories, Funny Stories for Kids, Hindi Kahaniya, Lotpot Kids, Wit and Wisdom

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